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बिहार का पहला पक्षी महोत्सव ‘कलरव’ जमुई में

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पटना.
पर्यावरण में पक्षियों के अध्ययन को लेकर बिहार में नयी पहल होने जा रही है. अन्य राज्यों की तर्ज पर बिहार सरकार ने जमुई जिले के नागी-नकटी बर्ड सेंचुरी जमुई, में राजकीय पक्षी महोत्सव ‘कलरव’ का आयोजन 15,16 और 17 जनवरी 2021 को करने जा रही है. इसका उद्देश्य है कि विभिन्न प्रकार के पक्षियों को जानने समझने का मौका पक्षी विज्ञानिकों को मिल सके. जमुई का नागी-नकटी वर्ड सेंचुरी का चयन इस समारोह के लिए इसलिए किया गया कि यह सेंचुरी विदेशी से आनेवाले पक्षियों के रूट में पड़ता है.
पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह कहते हैं, बिहार की नागी-नकटी बर्ड सेंचुरी जमुई, विदेशी पक्षियों के रूट में शामिल है. बिहार में भी बड़ी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षी हर साल यहां आते-जाते हैं.
बिहार में पक्षियों के संरक्षण को लेकर लंबे समय से व्यक्तिगत, संस्थागत व सरकारी स्तर पर कार्य किये जा रहे है. बिहार में कई नमी वाले इलाके भी हैं जहां पर प्रवासी पक्षी आते-जाते रहते हैं. यहां पक्षियों का अध्ययन करने वालों की संख्या बहुत ही कम है. पक्षियों के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव रहने के कारण पक्षियों का शिकार-व्यापार भी अधिक होता है. यहां पर आयोजित होनेवाले पक्षी महोत्सव में युवाओं को कई तकनीकी सत्रों के माध्यम से पक्षियों को पहचानने के तरीके बताए जायंगे और वैज्ञानिक तरीकों से उनके आहार-व्यवहार आदि से परिचित कराया जायगा. उन्हें क्षेत्र में ले जाकर भी पक्षियों के सम्बन्ध में जानकारियां दी जायंगी. राज्य और देश के अनुभवी पक्षी वैज्ञानिक और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के वैज्ञानिकों द्वारा आम लोगों और युवाओं को प्रशिक्षित किया जायगा . राज्य के महत्वपूर्ण पक्षी स्थलों के आस-पास के युवाओं को विशेष रूप से इस राजकीय पक्षी महोत्सव में आमंत्रित किया गया है. साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं, एनसीसी के कैडेट, विद्यार्थियों, ग्रामीणों, मछुआरों और अन्य समुदाओं को शामिल किया जायेगा, जो पक्षियों के अध्ययन और संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं. बताया जा रहा है कि जमुई वन प्रमंडल पदाधिकारी सत्यजीत कुमार, भरत चिंतापल्ल्ली और अरविन्द मिश्रा ने नागी, नकटी और जिले के पक्षियों के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर जायजा भी लिया है . इस क्रम में नकटी पक्षी अभयारण्य इलाके में ‘यूरेशियन राईनेक’ पक्षी को पहली बार देखा गया और 21 वर्षों के बाद ‘इंडियन कोर्सर’ पक्षी को भी देखा. 1998 में पहली बार दो की संख्या में ये ‘इंडियन कोर्सर’ यहाँ दिखे थे.फाल्केटेड डक का भी 2018, 2019 और 2020 में इस क्षेत्र में लगातार दिखना महत्वपूर्ण है.
जानकारों का कहना है कि जमुई स्थित नागी पक्षी आश्रयणी पूरे विश्व का तीन प्रतिशत राजहंसों का बसेरा बना यह आश्रयणी 500 एकड़ में फैला हुआ है. सर्दियों की शुरुआत के साथ ही यहां रंग-बिरंगे साइबेरियन पक्षियों का आगमन होने लगता है जिसमें राजहंसों भी शामिल हैं. सबसे ज्यादा विदेशी एवं देसी दुर्लभ प्रजाति के पक्षी आते हैं. सीजन में नागी झील पर आठ से नौ हजार की संख्या में पक्षी आते हैं. नकटी डेम पर चार से पांच हजार पक्षी मिले हैं. यहां दुर्लभ प्रजाति के फालकेटक डक पक्षी को भी देखा गया है. साथ ही विदेशी पक्षी में से वारहेडेड गुज, ग्रेलेग गुज, लालसर, डीधोच, सरार, कोमन पोचाड़, सुरखार, गेल, गडवाल सहित कई पक्षियों का झुंड को देखा जा सकता है. देसी पक्षी में जलमुर्गी, पनडुब्बी, पनकबुआ, कररा, हाजी लगलग, सफेद बजाज, धोधील, बगुले के चार प्रजातियां सहित कई पक्षियों का जमावड़ा भी लगता है.
बिहार में अन्य जलाशय भी हैं
नागी-नकटी जलाशय का अद्भुत प्राकृतिक नजारा बिहार के किसी दूसरे जलाशय में नहीं दिखता है. बिहार में बेगूसराय का कावर झील और वैशाली का वरेला झील व मधेपुरा का कुशेश्वर झील भी हैं. नागी-नकटी जलाशय आबादी से दूर व शांत माहौल होने के कारण और पक्षियों के लिए भारी मात्र में आहार की उपलब्धता की वजह से हर वर्ष प्रवासी पक्षियों की संख्या में वृद्धि हो रही है.

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