Home Big Grid प्रति दिन हिन्दी भाषा का एक शब्द जरूर सिखें

प्रति दिन हिन्दी भाषा का एक शब्द जरूर सिखें

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पटना. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के रिजनल आउटरिच ब्यूरो पटना, तथा फील्ड आउटरिच ब्यूरो, भागलपुर द्वारा आज ” राजभाषा के प्रचार प्रसार के संस्थागत प्रयास ” विषय पर वेब-गोष्ठी का आयोजन किया गया।

अतिथि वक्ता के रूप में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, पूर्वी चंपारण के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने वेब-गोष्ठी में राजभाषा के प्रचार-प्रसार के संस्थागत प्रयास पर अपना विचार रखते हुए कहा कि हिंदी भाषा का हमारे देश के एकीकरण में एक महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि जिस भाषा में हमारे अपने मौलिक विचार नहीं है, वो हमारी राजभाषा नही हो सकती है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध अच्छी किताबों को हिन्दी भाषा में अनुवाद कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि इससे एक ओर जहाँ रोजगार बढ़ेगा वहीं दूसरी ओर हमारी हिन्दी की शब्द संपदा में बढ़ोतरी होगी और हिन्दी भाषा को हम उंचाई पर ले जाने में सफल हो पायेंगे। आगे उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा में सही ढंग से कामकाज करने के लिए शब्द संपदा, व्याकरण और वर्तनी आदि को अच्छे से समझना और समझाना होगा। साथ ही देश के गैर-हिन्दी भाषी राज्यों के लोगों की हिन्दी में होने वाली त्रुटियों पर उपहास करने के बजाये उनका उत्साह बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, हिन्दी भाषी राज्यों के लोगों को दूसरी भारतीय भाषायें जैसे बांग्ला, उड़िया, तमिल, तेलगू और मलयालम जैसी सांस्कृतिक और साहित्यिक रूप से संपन्न भाषाओं को सीखना भी की आवश्यक है।
श्री शर्मा नें स्वतंत्रता संग्राम में हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं के योगदान पर बोलते हुए कहा कि देश की आजादी के साथ हिन्दी के विकास में भी इन पत्र-पत्रिकाओं का काफी योगदान रहा। श्री शर्मा ने हिन्दी सीखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिदिन कम-से-कम हिन्दी के एक शब्द को सीखने और प्रयोग करने की कोशिश करें तभी हम हिन्दी को विकसित कर पाएंगें।

अतिथि वक्ता के तौर पर शामिल तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. योगेंद्र महतो ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी दिवस को भारतीय भाषा दिवस के रूप में मनाए जाने की आवश्यकता है। सिर्फ हिंदी दिवस को हिंदी भाषा में सीमित रखना सही नहीं है। श्री योगेंद्र ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि सर्वोच्च न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तक बहस अंग्रेजी भाषा में होती है। यह हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में होनी चाहिए । यही आम जनमानस की भाषा है। अगर ऐसा हुआ तो हिंदी के साथ-साथ दूसरी भारतीय भाषाओं का भी वर्चस्व बढ़ेगा इस पर विचार करने की आवश्यकता है। श्री योगेंद्र ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक शब्दावली निर्माण आयोग भी हिन्दी को आगे बढाने की दिशा में आगे आयें । हिन्दी सिर्फ दान-अनुदान से आगे नहीं बढ़ पायेगी। अब राजभाषा आयोग की जगह राष्ट्रभाषा आयोग का शीघ्र गठन होना चाहिए, वह समय आ गया हैं।

दूसरे अतिथि वक्ता के रूप में पूर्णिया विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. कामेश्वर पंकज ने ” राजभाषा के प्रचार प्रसार के संस्थागत प्रयास” पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को चिन्हित करते हुए कहा कि देश-विदेश में करीब 150 संस्थाएं हिन्दी के प्रचार प्रसार में अपना योगदान दे रही हैं। बिहार में राष्ट्र भाषा परिषद , हिन्दी साहित्य सम्मेलन जैसे संस्थान अच्छा काम कर रही हैं । ये सभी संस्थाएं सरकारी अनुदान से चलती हैं। इन्हे और मजबूत करने की आवश्यकता है।

गोष्ठी के दूसरे सम्मानित वक्ता भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के विश्व हिन्दी सम्मेलन समन्वय समिति के हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य श्री वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि हिन्दी को प्यार-दुलार नहीं बल्कि व्यवहार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिन्दी में मूल शब्दों की संख्या लगभग ढाई लाख है,जबकि अंग्रेजी मे सिर्फ दस हजार ही मूल शब्द हैं। उन्होंने कहा कि हमें हिन्दी भाषा को बढावा देने के लिए जापान से सीखना चाहिए । श्री यादव ने कहा कि भारत सरकार के अथक प्रयास से अब तक सिर्फ चार राज्यों राजस्थान , उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश और बिहार के उच्च न्यायालय में ही हिन्दी को दैनिक काम काज मे शामिल किया गया है।

दूरदर्शन समाचार पटना के सहायक निदेशक श्री सलमान हैदर ने विषय प्रवेश करते हुए राजभाषा के प्रचार प्रसार मे संस्थागत तौर पर किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भाषा के दो आयाम होते हैं- एक बौद्धिक और दूसरा उपकरणीय। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति मे भी राजभाषा को महत्वपूर्ण दर्जा दिया गया है।

विशेष आमंत्रित अतिथि के तौर पर बिहार के लोक गायिका डाक्टर नीतू नवगीत ने इस मौके पर गोपाल सिंह नेपाली की हिंदी भाषा पर लिखी एक कविता का पाठ किया।
अध्यक्षीय भाषण के दौरान श्री एसके मालवीय, अपर महानिदेशक, आरओबी एवं पीआईबी, पटना ने कहा कि हिन्दी मां की तरह है और हमारी मातृभाषा है। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा अंग्रेजी की विरासत से मुक्ति की पहल हो चुकी है । नई शिक्षा नीति में अपनी भाषा को जगह दी गई है। उन्होने कहा कि भाषा से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है । विश्व के कई विकसित देशों ने अपनी भाषा को अपनाते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूती किया है।

पत्र सूचना कार्यालय पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार ने का वेब गोष्ठी का शुभारंभ , संचालन तथा अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी की बिंदी डॉट बन गई है । हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग बहुत बढ़ गया है,यह दुखद है । हिन्दी दिवस का आयोजन हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिये किया जाता है।
धन्यवाद ज्ञापन श्री अभिषेक कुमार क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, भागलपुर ने किया। वेब गोष्ठी में श्री विजय कुमार, निदेशक आरओबी एवं दूरदर्शन (न्यूज), श्री दिनेश कुमार, निदेशक, पीआईबी पटना सहित सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा अन्य प्रतिभागी भी शामिल थे।

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