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पारदर्शी कराधान देश को मजबूती प्रदान करने और सशक्त बनाने वाला है: हरिवंश

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पटना, 28 अगस्त 2020

पारदर्शी कराधान देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। यह व्यवस्था देश को मजबूती प्रदान करने और सशक्त बनाने वाला है। पारदर्शी कराधान (फेसलेस एसेसमेंट) जहां करदाताओं को आयकर विभाग के दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति दिलाएगा, वही आयकर विभाग के अधिकारियों को भी किसी करदाता से सीधे तौर पर मिलने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। यह बातें राज्यसभा सांसद और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो, पटना द्वारा आयोजित वेब गोष्ठी “पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान” के दौरान मुख्य अतिथि वक्ता के तौर पर कही। 

उन्होंने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में ईमानदार करदाताओं की महत्ती भूमिका होती है। 130 करोड़ की आबादी में करदाताओं की संख्या महज डेढ़ करोड़ है। 10 लाख या इससे अधिक की आमदनी की घोषणा करने वाले करदाताओं की संख्या जहां 24 लाख के आसपास है, वहीं 50 लाख या इससे अधिक की आमदनी घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या 1.70 लाख ही है। उन्होंने कहा कि लोग विदेशों में छुट्टियां मनाने जा रहे हैं, महंगी गाड़ियां खरीद रहे हैं, महंगी शादियों का आयोजन कर रहे हैं, यह आंकड़े हमें सुधरती आर्थिक स्थिति को दर्शाती है, लेकिन वहीं हमें दूसरी ओर देखना होगा कि हमारे टैक्सपेयर कितने हैं। उन्होंने कहा कि जो सक्षम हैं, वह जरूर कर दें। जो कर नहीं देते हैं, उन्हें समझने की जरूरत है कि वह देश के लिए कितना बुरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग जो भी खर्च करते हैं, उसका हिसाब जरूर दें।

अतिथि वक्ता के रूप में बिहार-झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त विरेंद्र सिंह ने कहा कि 13 अगस्त 2020 को जिस फेसलेस एसेसमेंट की बात की गई है, उसकी शुरुआत सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री ने दिल्ली में एक बैठक में की थी। इस बैठक में यह फैसला लिया गया था कि आयकर अधिकारियों और करदाताओं के बीच कोई इंटरफेस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था के अंतर्गत संबंधित राज्य के अधिकारी को उस राज्य का कोई भी केस नहीं दिया जाएगा। टैक्स का एसेसमेंट तीन चरणों में होगा- एसेसिंग ऑफीसर केस को एग्जामिन करके नेशनल ई-एसेसमेंट सेंटर को भेजेगा, जिसके बाद यह मामला वेरिफिकेशन यूनिट के पास जाएगा, जहां से टेक्निकल रिव्यू के लिए नेशनल एसेसमेंट सेंटर के पास वापस भेजा जाएगा जिसे एक नया एसेसिंग ऑफीसर जांच करेगा। इस प्रक्रिया में कोई कमी पाए जाने पर करदाता को एक मौका दिया जाएगा कि वह अपनी जानकारी पेश करें। इस व्यवस्था में एक सुविधा और दी गई है कि करदाता को उसके ट्रांजैक्शन की जानकारी उसके पोर्टल पर दे दी जाएगी, इस बीच अगर कोई जानकारी छूट गई है तो करदाताओं के पास यह अवसर होगा कि वह अपने आय की जानकारी अपलोड कर सकें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस व्यवस्था से नए करदाता जुड़ेंगे। 

अतिथि वक्ता के रूप में शामिल चार्टेड अकाउंटेट रितेश आनंद ने इस व्यवस्था की कुछ चुनौतियों की बात करते हुए कहा कि यह फेसलेस एसेसमेंट की सुविधा में ई-असेसमेंट पहले भी किया जा रहा था, जहां हम इलेक्ट्रॉनिकली फाइल अपलोड करते थे, लेकिन हमारे पास इस स्पेस की सीमा तय होती थी। ऐसे में बड़ी फाइल कैसे अपलोड की जाएंगी यह समस्या करदाता के सामने आएगी। उन्होंने यह चिंता व्यक्त की कि कई बार कानून बनते तो है लेकिन उन्हें लागू होने में समय लगता है।  इस व्यवस्था के तहत राज्य अलग-अलग होंगे तो भाषा, व्यापार करने का तरीका, अधिकारियों के काम करने का तरीका यह सब भी एक बड़ी चुनौती बनने वाला है।

वेब-गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पीआईबी के अपर महानिदेशक एस के मालवीय ने कहा कि यह व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इस व्यवस्था के तहत करदाता घर बैठे ही कर संबंधी अपनी तमाम समस्याओं, जरूरतों को पूरी कर पाएंगे। पारदर्शी कराधान न केवल देश के अस्तित्व के लिए बल्कि देश के विकास के लिए भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतिहास के दहलीज पर हिन्दुस्तान खड़ा है।

पीआईबी के निदेशक दिनेश कुमार ने विषय प्रवेश करते हुए कहा की पारदर्शी कराधान तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल की ओर ले जाने की एक पहल है। यह संरचनात्मक परिवर्तन की ओर उठाया जा रहा कदम है। उन्होंने कहा कि फेसलेस एसेसमेंट से समस्या रहित, विवाद रहित, सम्मान सहित, निष्पक्ष रुप से काम करने की व्यवस्था है। यह कर प्रक्रिया के सुधार का एक बड़ा कदम है। करदाताओं को ना अधिकारियों से मिलने की आवश्यकता होगी और ना ही आयकर दफ्तर जाने की। 

वेब गोष्ठी का संचालन कर रहे पीआईबी के सहायक निदेशक संजय कुमार ने कहा कि कोरोना की चुनौतियों के बीच अलग-अलग समूहों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने समय-समय पर पहल की है। इस बार की यह पहल देश के टैक्स देने वालों के लिए की गयी है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से टैक्स अदा करने वाले लोगों की शिकायत लंबे समय से रही है कि वे अपना टैक्स तो चुकता कर देते हैं, पर उन्हें बदले में परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिलती। इन्हे राहत देने की कोशिश माननीय प्रधानमंत्री मोदी ने की है। यह व्यवस्था कर प्रणाली को पारदर्शी बनाने के अलावा टैक्सपेयर्स को सशक्त करेगी। 

वेब-गोष्ठी का सह-संचालन एफओबी, छपरा के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन पीआईबी के सूचना अधिकारी मोहम्मद इफ्तेखार आलम ने किया। गोष्ठी में आरओबी एवं दूरदर्शन, पटना के निदेशक विजय कुमार सहित विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

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