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मधुमेह एक मेटाबोलिक डिजऑर्डर हैः डॉ. के.पी.लाल

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मधुमेह एक मेटाबोलिक डिजऑर्डर है। डा‍यबिटीज के दौरान देखभाल आदि संबंधित जानकारी के लिए ये पढ़े ।अगर इसका मरीज अपना पूरा ख्याल रखे और व्यायाम करने के साथ साथ उचित खाद्य पदार्थों का सेवन करे तो इस रोग पर काबू पाया जा सकता है और इस रोग से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। डायबिटीज के मरीज के लिए सबसे ज्‍यादा जरूरी है खान-पान पर कंट्रोल करना।
डायबिटीज एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्ति के शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है और शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं। इंसुलिन बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह ब्लड से शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज को पहुंचाता है। इसके अलावा यह मेटाबोलिज्म पर भी कई अन्य प्रभाव डालता है।
व्यक्ति जो भोजन करता है वह शरीर को ग्लूकोज प्रदान करता है जिसे कोशिकाएं शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में उपयोग करती हैं। यदि शरीर में इंसुलिन मौजूद नहीं होता है तो वे अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाती हैं और  ब्लड से कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं पहुंचा पाती हैं। जिसके कारण ग्लूकोज ब्लड में ही इकट्ठा हो जाता है और ब्लड में अत्यधिक ग्लूकोज विषाक्त हो सकता है।
मधुसूदनी (इंसुलिन) अग्न्याशय यानि पैंक्रियाज़ के अन्तःस्रावी भाग लैंगरहैन्स की द्विपिकाओं की बीटा कोशिकाओं से स्रावित होने वाला एक जन्तु हार्मोन है। रासायनिक संरचना की दृष्टि से यह एक पेप्टाइड हार्मोन है जिसकी रचना 51अमीनो अम्ल से होती है। यह शरीर में ग्लूकोज़ के उपापचय को नियंत्रित करता है। पैंक्रियाज यानी अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रन्थि है जो आमाशय के नीचे कुछ पीछे की ओर स्थित होती है। भोजन के कार्बोहइड्रेट अंश के पाचन के पश्चातग्लूकोज का निर्माण होता हैं। आंतो से अवशोषित होकर यह ग्लूकोज रक्त के माध्यम से शरीर के सभी भागों में पहुंचता है। शरीर की सभी सजीव कोशिकाओं में कोशिकीय श्वसन की क्रिया होती है जिसमें ग्लूकोज के विघटन से ऊर्जा उत्पन्न होती है जिसका जीवधारी विभिन्न कार्यों में प्रयोग करते हैं। ग्लूकोज के विघटन से शरीर को कार्य करने, सोचने एवं अन्य कार्यों के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है।
लक्षण
• लगातार पेशाब आना
• प्यास अधिक लगना
• अत्यधिक भूख लगना
• बिना वजह शरीर का वजन घटना
• पेशाब में किटोन की उपस्थिति
• थकान
• चिड़चिड़ापन
• अचानक वजन बढ़ना
• आंखों से धुंधला दिखायी देना
• घाव धीरे-धीरे भरना
• लगातार त्वचा, योनिऔर मसूढ़ों में संक्रमण बने रहना
डायबिटीज व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है। यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था के दौरान दिखायी देता है। इस रोग का सबसे सामान्य प्रकार है और 40 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों में डायबिटीज होना सामान्य बात है।
फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट
यह टेस्ट कराने से पहले व्यक्ति को कुछ खाने के लिए मना किया जाता है अर्थात् खाली पेट रहने के करीब 8 घंटे बाद फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट किया जाता है। यह टेस्ट डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का पता लगाने के लिए किया जाता है।
ओरल ग्लूकोज टॉलिरेंस टेस्ट
यह टेस्ट भी खाली पेट किया जाता है। यह टेस्ट करने से दो घंटे पहले मरीज को ग्लूकोज युक्त पेय पदार्थ पिलाया जाता है।
रैंडम ग्लूकोज टॉलिरेंस टेस्ट
इस टेस्ट में डॉक्टर मरीज के रक्त शर्करा की 4 बार जांच करते हैं। यदि आपका ब्लड शुगर लेबल दो बार सामान्य से अधिक पाया जाता है तो आपको जेस्टेशनल डायबिटीज है।
डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है और व्यक्ति जीवनभर डायबिटीज से पीड़ित रहता है। लेकिन डायबिटीज के लक्षणों से बिना किसी दवा के प्रतिदिन एक्सरसाइज, संतुलित भोजन, समय पर नाश्ता और वजन को नियंत्रित करके छुटकारा पाया जा सकता है। विशेष आहार डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करता है।
डायबिटीज के मरीजों के इलाज के लिए नियमित इंसुलिन का इंजेक्शन दिया जाता है और विशेष आहार लेने एवं एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। जबकि डायबिटीज से पीड़ित रोगियों के इलाज के लिए टेबलेट और कभी-कभी इंजेक्शन भी दिया जाता है। इसके बावजूद यदि शुगर नियंत्रित नहीं हो पा रहा है तो मरीज में इसकी गंभीरता बढ़ने की अत्यधिक संभावना होती है।
डायबिटिज से बचने के लिए इनका करें उपयोगः
शुगर एक गंभीर बीमारी है। इससे पीड़ित व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर डायबिटीज से बचाव किया जा सकता है।
• मीठे खाद्य पदार्थ और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खाने से परहेज करें।
• नियमित एक्सरसाइज करें, सुबह-शाम टहलें और खूब शारीरिक परीश्रम करें। शरीर को अधिक से अधिक एक्टिव रखें। इससे आप शुगर से बच सकते हैं।
• अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीएं और मीठे एवं सोडा युक्त पेय पदार्थ का सेवन करने से बचें। संभव हो तो आइसक्रीम भी न खाएं।
• अगर आपके शरीर का वजन बढ़ गया हो तो उसे शीघ्र नियंत्रित करें अन्यथा शुगर होने का खतरा बढ़ सकता है।
• धूम्रपान एवं एल्कोहल का सेवन न करें, अन्यथा शुगर होने की संभावना बढ़ सकती है।
• अधिक फाइबर एवं प्रोटीन युक्त भोजन शुगर से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है।
• ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी है इसलिए विटामिन डी की शरीर में कमी न होने दें।
(MBBS, MD, सुपर स्पेश्लाईजेशन इन डॉयबिटिज, न्यू कॉस्टल यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया)

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