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राजगीर की झील में भगवान बुद्ध दूसरी बड़ी प्रतिमा का अनावरण

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बीडीएन डेस्क
बिहार के नालंदा जिला के राजगीर स्थित घोड़ा कटोरा झील में भगवान बुद्ध की धर्मचक्र परिवर्तन मुद्रा में बने प्रतिमा का अनावरण किया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज इस प्रतिमा का अनावरण किया। इसके पूर्व महाबोधि टेंपल के मुख्य माॅक भंते चालिन्दा समेत बड़ी संख्या में आए बौद्ध भंतों के साथ मुख्यमंत्री ने सामूहिक मंत्राेच्चार किया एवं श्रद्धा भक्ति के साथ परिष्क्रम प्रार्थना में सम्मिलित हुये और पूजा-अर्चना की। 70 फीट ऊॅची भगवान बुद्ध की यह प्रतिमा देश की दूसरी सबसे ऊॅची प्रतिमा है। यह पूर्णतः पत्थर से निर्मित है। इसमें 45 हजार घन फूट गुलाबी रंग का शैंड स्टोन लगाया गया है। झील की सतह में 16 मीटर गाेलाई वाला पैडेस्टल बनाया गया है, जिसके ऊपर प्रतिमा स्थापित की गई है। यहाॅ स्थापित की गयी प्रतिमा पत्थर की है। कहीं दूसरी जगह ऐसी पत्थर की प्रतिमा नहीं मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने घोड़ा कटोरा झील में नौका विहार कर भगवान बुद्ध की प्रतिमा की परिक्रमा की। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घोड़ा कटोरा झील ऐतिहासिक स्थल है। यह प्राकृतिक झील है। ये पंच पहाड़ी के बीच में है और यहां पर
भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि यहाॅ लोग आएंगे और झील में भ्रमण करेंगे तथा भगवान बुद्ध के दर्शन का भी सौभाग्य हासिल करेंगे, इसका पूरा ख्याल रखा गया है। वन विभाग द्वारा स्थापित टावर से ही सब कुछ दिखायी पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईको टूरिज्म के लिए यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यहां पेट्रोल, डीजल से चालित कोई भी वाहन नहीं चलेंगे। उन्होंने कहा कि हमलाेगाें ने पहले ही इस बावत निर्णय लिया है कि यहाॅ इलेक्ट्राॅनिक गाड़ियां ही चलेंगी। भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के पूर्व भी यहाॅ आये थे और ज्ञान प्राप्ति के बाद भी यहाॅ आये। भगवान बुद्ध यहाॅ वेणुवन में ही बारह वर्षों तक रहे। गृद्धकूट पर्वत से ही उन्होंने उपदेश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान महावीर की भी यह पुण्य भूमि है। इस लिहाज से यह अद्भुत है। हिन्दुओं के लिये यहाॅ मलमास मेंला लगता है और शुरू से ही अवधारणा है कि 33 करोड़ देवी-देवता यहाॅ इकट्ठा होते हैं। मखदुम साहब का भी यहाॅ से नाता रहा और बहुत पहले यही मगध की राजधानी थी। उन्होंने कहा कि पौराणिक, धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो जरासंध का अखाड़ा भी यही था।

यही पाण्डु पोखर भी है। सिखों के पहले गुरू गुरू नानक देव भी यहाॅ आये थे। गुरू नानक देव के बारे में मान्यता है कि पटना साहिब में भी आये थे आॅर यहाॅ भी उन्होंने काफी वक्त गुजारा। कहा जाता है कि गया हाेते हुये वे नवादा के रास्ते यहाॅ आये। यहाॅ गर्म पानी का झरना है और मान्यता के मुताबिक जब गुरू नानक देव गर्म कुंड पहुॅचे ताे उनम स्पर्ष से ही वहाॅ का कुंड शीतल हो गया इसलिये उस स्थल को गुरू नानक शीतल कुंड कहा जाता है। अगले वर्ष उनका 550वां जन्मोत्सव मनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के लोगों ने उनसे कहा था कि हमलोग वहाॅ पर एक
नया गुरूद्वारा बनायें गए।

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