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शराबबंदी से कम हुई घरेलू हिंसा पर नहीं कम हुए पर्यटक : मुख्यमंत्री

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पटना

बिहार में नशा मुक्ति दिवस का सरकारी आयोजन सोमवार को पूरे सूबे में किया गया. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए.साथ ही उन्होंने अपना नशा मुक्ति का संदेश मोबाइल के माध्यम से राज्य के सभी मुखिया व अन्य जनप्रतिनिधियों को भेजा. राजधानी के अधिवेशन भवन में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी का असर दिखने लगा है. शराब के बंद होने के कारण घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, सड़क दुर्घटना, आपसी कलह जैसे अन्य कई मामलों में कमी आयी है.हालांकि इसका असर पर्यटन पर नहीं पड़ी. उन्होंने बताया कि शराबबंदी के बाद पर्यटकों की संख्या में कोई कमी नहीं हुई है.

शराबबंदी के बाद भी 3 करोड़ से अधिक टूरिस्ट बिहार आये
इस मौके पर बताया गया कि शराब का अवैध धंधा करने वाला शान से नहीं बल्कि सिर झुकाकर चलेगा और लोग उस पर थू-थू करेंगे. बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद पूरे देश में ऐसी स्थिति आ गयी है कि हर ओर शराबबंदी की मांग तेजी से मुखर होने लगी है. तमिलनाडु में शराब से 18 से 20 हजार करोड़ की आमदनी होती है, बावजूद इसके जब करुणानिधि जीवित थे, तब वे कहते थे कि अगर बिहार में नीतीश कुमार शराबबंदी लागू कर सकते हैं तो फिर तमिलनाडू में हम क्यों नहीं कर सकते ? मुख्यमंत्री ने बताया कि केरल में ईसाई समुदाय के लोगों ने उनको बुलाया और हमने उन्हें बताया कि शराबबंदी से बिहार आने वाले टूरिस्टों की संख्या में कोई कमी नहीं आयी है. शराबबंदी के बाद भी 3 करोड़ से अधिक टूरिस्ट बिहार आये और 10 लाख से ज्यादा पर्यटकों का बिहार आगमन हुआ. उन्होंने कहा कि पहले वर्ष 1000 करोड़ का नुकसान हुआ था लेकिन उसके बाद कोई चिंता ही नहीं रही. अर्थव्यवस्था का आकलन सिर्फ सरकार के खजाने से नहीं बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति से भी किया जाता है. उन्होंने कहा कि डायरेक्टिव प्रिंसिपल और सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह साफ कर देता है कि शराब का सेवन कोई मौलिक अधिकार नहीं है.

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