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JEE में कम स्कोर वाले भी टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में पा सकते हैं दाखिला

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बीडीएन, पटना

मैट्रिक में फेल हुये थे रवीन्द्रनाथ टैगोर, बाद में मिला विश्व का सबसे बड़ा नोबेल पुरस्कार

जेई में कम स्कोर लाने वाले छात्र-छात्राएँ भी बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में दाखिला प्राप्त कर सकते हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में सरकार से मान्यता प्राप्त कई नामी निजी कॉलेज एवं विश्वविद्यालय हैं जहाँ राज्य सरकार द्वारा आयोजित काउन्सेलिंग प्रक्रिया में शामिल होकर छात्र-छात्राएँ आसानी से एडमिशन ले सकते हैं. कई बड़े निजी विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय-स्तरीय काउन्सेलिंग प्रक्रिया में शामिल होकर छात्र-छात्राएँ सीट पा सकते हैं.

आवश्यकता इस बात की है कि छात्र-छात्राओं को पता होना चाहिये कि देश के किन-किन निजी कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का स्तर उच्च है, इन्फ्रास्ट्रक्चर- लैब- लाइब्रेरी इत्यादि पर्याप्त हैं या नहीं, प्लेसमेंट रिकॉर्ड कैसा रहा है, इत्यादि.

पहली बार 12वीं पास करने वाले छात्र-छात्राओं अथवा पहली बार अपने बच्चे का एडमिशन कराने का प्रयास करने वाले अभिभावकों के पास देश भर के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के स्तर के सम्बंध में पर्याप्त एवं तुलनात्मक जानकारी का उपलब्ध नहीं होना स्वाभाविक है. नामांकन प्रक्रियाओं के सम्बंध में भी उनके पास जानकारी का अभाव देखा गया है.

कॉलेज का स्तर समझने के लिये भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा कराया गया एन आई आर एफ (NRIF) रैंकिंग महत्वपूर्ण है जो केन्द्र सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

इसके अलावे अन्य कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों का स्तर जानने-समझने में कैरियर काउन्सलर मददगार हो सकते हैं, बशर्ते कि आपका सम्पर्क सही कैरियर काउन्सलर से हो पाये.

चूँकि कैरियर काउन्सलर सालों भर इन्हीं विषयों पर रिसर्च करते रहते हैं. साथ ही, वे देश के अलग-अलग राज्यों के कई कॉलेजों- विश्वविद्यालयों में व्यक्तिगत रूप से विजिट भी कर चुके होते हैं. सैकड़ों छात्र-छात्राओं को अलग-अलग राज्यों के काउन्सेलिंग प्रक्रियाओं में मदद कर चुके होते हैं. ऐसे में इन विषयों में उनका अनुभव-स्तर काफी अधिक हो जाता है जो नये छात्र-छात्राओं को कैरियर की दिशा चुनने में काफी सहायक हो सकता है.

किंतु कैरियर काउन्सलर पर भरोसा करने से पहले यह अवश्य पता कर लेना चाहिये कि उनका कार्य-अनुभव कितने वर्षों का है एवं बातचीत के दौरान उनकी ईमानदारी एवं नैतिकता को भी जाँच-परख लेना आवश्यक है, वरना कई बार कई लोग इस क्षेत्र में ठगी का भी शिकार हो जाते हैं.

ठगी का शिकार होने से बचने के लिये एक महामंत्र यह भी है कि छात्र-छात्राएँ एवं उनके अभिभावक डोनेशन पर आधारित एडमिशन से बचें. कॉलेज के नाम से डिमांड ड्राफ्ट या चेक देकर ही कॉलेज के समस्त प्रकार के शुल्क का भुगतान करें एवं उस शुल्क का कॉलेज-रसीद प्राप्त करें.

कई बड़े कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा की सीटों का फी साधारण फी से ज्यादा होता है. इस प्रकार के अतिरिक्त फी का भुगतान भी कॉलेज द्वारा डिमांड ड्राफ्ट के रूप में लिया जाता है. जोखिम की सम्भावना कैश पेमेंट में होती है जिसका कॉलेज द्वारा कोई रसीद नहीं दिया जाता है. इस प्रकार के भुगतान से छात्र- छात्राओं एवं अभिभावकों को बचना चाहिये.

अगर कोई काउन्सलर डोनेशन देकर सरकारी कॉलेजों में एडमिशन की बात कहता हो, तो तुरन्त ऐसे काउन्सलर के पास से उठकर चल देना उचित है एवं आगे से उसका कॉल रिसीव करना बंद कर देना चाहिये. वहाँ ठगी 100% सुनिश्चित है.

किसी भी राज्य के जो भी सरकारी कॉलेज होते हैं, उनमें दाखिले के लिये उस राज्य सरकार द्वारा आयोजित काउन्सेलिंग- प्रक्रिया ही एक मात्र प्रवेश पाने का रास्ता है. कभी-कभी अंत समय में कुछ सीटें खाली होने की स्थिति में कॉलेज द्वारा भी अपने स्तर पर विज्ञापन देकर आवेदन आमंत्रित किया जाता है, उसके बाद मेरिट के आधार पर सीटें दी जाती हैं.

प्रसिद्ध निजी कॉलेजों में भी राज्य सरकार द्वारा आयोजित काउन्सेलिंग प्रक्रिया के जरिये नामांकन होता है. समय के अनुसार इसके लिये समस्त प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी होता है. इन कार्यों में उचित मार्गदर्शन के लिये अनुभवी एवं ईमानदार काउन्सलर सहायक हो सकते हैं.

#मैट्रिक में फेल हुये थे रवीन्द्रनाथ ठाकुर, बाद में मिला विश्व का सबसे बड़ा नोबेल पुरस्कार:

ऐसा देखा गया है कि जब किसी छात्र अथवा छात्रा का जेई में कम अंक आ जाता है तो उनके अभिभावक निराश हो जाते हैं और फिर उनके दवाब में छात्र अथवा छात्रा भी निराश हो जाते हैं. ऐसा पारिवारिक- सामाजिक वातावरण बच्चों के लिये उचित नहीं है.

कई बार ऐसे दवाब में छात्र-छात्राओं द्वारा आत्महत्या करने की कोशिश की खबरें भी पढ़ने में आई हैं. ऐसा करना कदापि उचित नहीं है. जीवन बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण होता है, और जीवन की कोई एक असफलता का मोल कौड़ी भर भी नहीं होता. हजारों लोग असफलता के अनुभव से सीख लेकर सफलता के शिखर तक पहुँचते हुये देखे गये हैं.

#बिना जेई एपियर वालों के लिए भी मौकों की कमी नहीं:

कैरियर काउन्सलर धनंजय बताते हैं कि 12वीं पास वैसे छात्र-छात्राएँ जिन्होंने जेई की परीक्षा नहीं दी है, उनके लिये भी इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिये अच्छे अवसरों की कमी नहीं है. देश के कई राज्यों के अच्छे निजी कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी में 12वीं के मार्क्स के आधार पर भी एडमिशन होता है. किंतु इसके लिये इस जानकारी का होना बहुत आवश्यक है कि कौन से कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी का स्तर कैसा है. यहाँ पर अच्छे कैरियर काउन्सलर की सलाह महत्वपूर्ण है.

12वीं के बाद बीबीए, बीसीए, लॉ, होटल मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर, फॉरेस्ट्री, फार्मेसी, लैब टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी इत्यादि कोर्सों में भी कैरियर की अच्छी संभावनाएँ होती हैं. इसके लिये भी अच्छे कॉलेजों का चयन महत्वपूर्ण है.

मैट्रिक पास छात्र-छात्राओं के लिये आई टी आई एवं पॉलिटेक्निक अच्छा विकल्प है.

– धनंजय कुमार सिन्हा, कैरियर काउंसलर, टैगोर एडुकॉन्स, पटना
व्हाट्सएप : 8825172718

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