Home Big Grid इलाज की उम्मीद खत्म तो मिल सकती है ईच्छा मृत्यु

इलाज की उम्मीद खत्म तो मिल सकती है ईच्छा मृत्यु

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सुप्रमी कोर्ट के दिये गये एक आदेश का लाभ लाइलाज बीमारी से जूझ रहे लोगों के पक्ष में आया है.  कोर्ट ने कहा है कि सम्मान से मरने का हक इंसान को है. कुछ शर्तों के साथ लोगों को ईच्छा मृत्यु की अनुमति दी जा सकती है. कोर्ट के इस आदेश से कोमा में लंबे समय तक जीनेवाले इंसानों को अब ईच्छा मृत्यु की अनुमति मिल गयी है. ईच्छा मृत्यु (यूथेनेसिया) को लेकर कोर्ट ने गाइडलाइन दी है.

अदालत ने कहा है कि ईच्छा मृत्यु के लिए मरीज के परिजनों के अलावा चिकित्सकों की अनुमति भी आवश्यक है. यूथेनेसिया दो प्रकार की होती है. इसमें एक है एक्टिव यूथेनेसिया और दूसरी है पैसिव यूथेनेसिया. एक्टिव यूथेनेसिया में मरीज को जहरीला इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद मरीज की मौत हो जाती है. दूसरा है पैसिव यूथेनेसिया. इसमें मरीज के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटा दिया जाता है जिसके सहारे वह जिंदा रहता. लाइव सपोर्ट सिस्टम हटाने से धीर-धीरे मरीज की मौत हो जाती है.

संविधान पीठ की अध्यक्षता करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने स्पष्ट किया था कि जीने के हक में गरिमापूर्ण मृत्यु का भी अधिकार शामिल है. गरिमापूर्ण मृत्यु वैसी होनी चाहिए जिसमें दर्द रहित हो. अदालत ने कहा है कि ईच्छा मृत्यु के लिए मजिस्ट्रेट के सामने वसीहत होनी चाहिए. बिहार में भी एक महिला लंबे अरसे तक कोमा में जिंदा रही थी. उसके परिजनों ने उसकी ईच्छा मृत्यु के लिए अदालत से अनुरोध भी किया था.

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