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भारत-नेपाल सीमा सील, सोमवार को चुनाव

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सीमा से लगे नेपाल के आठ जिलो में स्थानीय निकाय चुनाव
विजय कुमार, रक्सौल

नेपाल में आगामी सोमवार को घोषित स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर भारत-नेपाल सीमा को सील कर दिया। सीमा से लगे नेपाल के 8 जिले की पुलिस व सशस्त्र सीमा बल तैनात कर दिए गए है।भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी इस कार्य में सहयोग कर रही है।एसएसबी के जवान भी सीमाई क्षेत्रीं की स्थिति पर पैनी निगाह बनाये हुए है।हर आवाजाही के वाहनों को सीमा पार करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है।इसके लिये पश्चिमी चम्पारण के बाल्मीकिनगर, भीखनाथोरी, इनरवा, सिकटा,पूर्वी चम्पारण के मुशहरवा,हरैया-पनटोका,दिल्ली-काठमांडू राष्ट्रीय राजमार्ग रक्सौल,नायक टोला,घोड़ासहन,बेलदरवा-इनरवा,लाला छपरा,मूर्तिया,कोरैया प.टोला,चंद्रमण व महुअवा गांवों के सीमाई रास्ते को पूर्णतः बन्द कर दिया गया है।साथ ही इससे जुड़े नेपाली बाजार व गांव भैसालोटन,ठोरी,भिस्वा, बिश्रामपुर,कल्याणपुर,छतवा,मटीआरवा,अमवा,गिरकहिया आदि गांवों के लोगों को रोजमर्रे की जरूरतों के लिए भारतीय क्षेत्रों में आवाजाही बन्द होने से परेशानी होने लगी है।पैदल आने-जानेवालें लोगों की भी सघन तलाशी ली जा रही है।प्रत्येक दो पहिया,चार पहिया जैसे वाहनों पर भी नेपाल प्रवेश पर रोक है।इसके कारण रक्सौल में जाम का नजारा उपस्थित हो गया है।तेल टैंकरों व माल वाहक गाड़ियों की मीलो कतार लग गयी है।बताते है कि नेपाली प्रशासन व बारा(नेपाल) पुलिस के द्वारा प्रत्येक लोगों के लिये पहचान पत्र साथ लेकर चलने की हिदायत दे दी गयी है।इसके तहत सभी लोगों के किये पहचान पत्र अनिवार्य कर दिए गए है।चुनाव आगामी सोमवार को निर्धारित है जिसके शांतिपूर्ण संचालन के लिए 48 घण्टे पहले ही दोनों देशों के आपसी समन्वय के मातहत बोर्डर के पार आने-जाने की मनाही है।इस बाबत गत दिनों नेपाल के बीरगंज में दोनों देशों के अधिकारीयों की बैठक हुई थी,जिसमें स्थानीय निकाय के चुनाव के सफल व शांतिपूर्ण संचालन के लिए आपसी समन्वय पर जोर दिया गया था।इस बाबत पूर्वी चम्पारण के डीएम रमन कुमार का कहना है कि नेपाल में होनेवाले चुनाव को लेकर यह कदम उठाया गया है।दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अपराधिक गतिविधियों से निबटने के लिए तैयार है। करीब 26 लाख 64 हजार वोटर है।6627 पदों पर हो रहे है चुनाव,जिसमें 136 जगहों के लिए चुनाव हो रहे है।प्रदेश सं.दो में हो रहा है चुनाव।इस चुनाव को लेकर मधेशी समुदाय व दलीय नेताओं ने काफी विरोध भी किया था।नई सरकार के गठनोपरांत चुनाव की कवायद शुरू हुई। मधेशियों के विरोध के मद्देनजर लगातार चुनाव की तिथियां विस्तारित की गयी। यह चुनाव नवम्बर में होनेवाले संसदीय चुनाव के लिए सेमी फाइनल माना जा रहा है।इसके लिए सभी राजनैतिक पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा दी है।चुनाव प्रचार के लिए पीएम शेर बहादुर देउबा,पूर्व पीएम पुष्पकमल दहल उर्फ़ प्रचंड,माधव कुमार नेपाल जैसे दिग्गज नेता भी बीरगंज में चुनावी सभा में वोटरों से अपने दलीय प्रत्याशियों के पक्ष में वोट की अपील कर चुके है।

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