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महागठबंधन में खतरे का असार

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बीडीएन,पटना

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर होनेवाले मतदान के पहले महागठबंधन में अब गांठ दिखने लगी है. ईद के पहले राजद व जदयू नेताओं के बीच जारी वाक् युद्ध अब संकट का संकेत देने लगा है. बिहार में महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने बयान देकर इसे और हवा दे दी. आजाद ने नीतीश कुमार का नाम सीधे तौर पर न लेकर कहा कि जो लोग कई सिद्धांतों पर भरोसा रखते हैं वह कई तरह के फैसले लेते हैं. बस क्या था इसका जवाब जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने गैर एनडीए दलों के बिखराव का ठीकरा कांग्रेस के माथे फोड़ दिया. जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कांग्रेस पर सीधे आरोप मढ़ा और कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी एकता नहीं हो पाने के पीछे कांग्रेस की जिद रही. मीरा कुमार के नाम का फैसला कांग्रेस की मनमानी थी. उन्होंने बताया कि आरंभ से ही कांग्रेस अपने ही दल का प्रत्याशी राष्ट्रपति चुनाव के लिए देने पर अड़ी हुई थी. श्री त्यागी ने बताया कि चेन्नई में नीतीश कुमार की यात्रा करुणानिधि के जन्मदिन समारोह के सिलसिले में हुई थी. उस यात्रा में वाम दल के नेता सीताराम येचुरी और डी राजा के साथ उनकी बातचीत में गोपाल कृष्ण गांधी के नाम पर सहमति बन गई थी. देवगौड़ा और शरद पवार और ममता बनर्जी भी एकमत के थे कि संयुक्त विपक्ष का प्रत्याशी कांग्रेस की ओर से नहीं आए. उन्होंने बताया कि शरद पवार तो आखिर समय तक बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर के लिए लगे रहे. शिवसेना की भी सहमति थी. इस तरह भाजपा ने भी कभी यह नहीं बताया कि रामनाथ कोविंद के रूप में वह दलित को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाने जा रही है. त्यागी ने कहा कि भाजपा अगर दलित नेता कोविंद का नाम सर्व सम्मति के लिए आगे करती तो वह सर्व-सम्मति भी संभव थी. पर वह मनमाने ढंग से राजनीति करती रही. रामनाथ कोविंद के नाम का समर्थन जदयू के लिए एक अलग किस्म का फैसला था. उनका विरोध आसानी से संभव नहीं था. क्योंकि राज्यपाल पद की गरिमा का उन्होंने साधारण तरीके से निर्वहन किया है.

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