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जब पति ने बेटे के कमर में बांधी पत्नी की लाश, बाइक से लेकर गये घर

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बाइक पर शव को ले जाते पिता व पुत्र

बीडीएन,डेस्क. बिहार में अस्पतालों तक मरीजों को पहुंचाने और अस्पताल में मौत होने के बाद शव को घर पहुचाने के लिए शववाहनों की सरकारी व्यवस्था की गयी है. पर पूर्णिया सदर अस्पताल में शव वाहन नहीं मिलने पर एक पति ने अपनी पत्नी की लाश को बेटे के कमर में बांध दिया और दोनो बाइक पर ही शव को लेकर 20 किलोमीटर अपने गांव पहुंच गये. महिला की मौत सदर अस्पताल पूर्णिया में हो गयी थी.

 बताया जा रहा है कि मरीज की मौत के बाद शव ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला तो महिला के बेटे ने एक ऑटो वाले से बात की. ऑटो वाले ने उससे ₹1500 की मांग की.  जब रुपये  की व्यवस्था नहीं हो सकी तो महिला के पति ने बाइक चलाने से पहले बेटे की कमर से पत्नी की लाश को बांध दिया और फिर खुद पीछे बैठ गया. मृतक महिला के परिजनों के अनुसार उन्होंने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस को लेकर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात  एक डॉक्टर से बात की. पर उस डाक्टर ने किसी अन्य  पदाधिकारी से बात करने को कहा. परेशान रहने के बाद जब लाश ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला तो मृतक महिला के पति ने उसे बाइक पर ले जाने का फैसला किया और वह अपनी पत्नी की लाश को बाइक पर बेटे के सहारे 20 किलोमीटर दूर अपने गांव तक ले गया.

महिला के पति श्रीनगर गांव निवासी शंकर शाह ने बताया कि पत्नी को टीबी, हृदयरोक और दमा की बीमारी थी. तबीयत खराब होने पर कुछ दिन पहले उसको सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था.  शुक्रवार की देर रात पत्नी की मौत हो गई. डॉक्टर ने कहा कि शव को ले जाओ नहीं तो और कई मरीजों की तबीयत खराब हो जाएगी. जब हमने कहा कि शव ले जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था करा दीजिए तो इलाज करने वाले डॉक्टर ने कहा कि इसके लिए तुमको आगे बात करने की जरूरत होगी.  परेशान होकर पति ने बेटे से एक ऑटो वाले से बात करने के लिए भेजा पर ऑटो वाले ने भी उससे ₹1500 की मांग की. उन्होंने बताया कि उस समय उनके पास इतने पैसे नहीं थे. अंत में बेटे से कहा कि वह बाइक से ही लाश को लेकर घर चले. हालांकि इस मामले के सामने आने पर पूर्णिया सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर mm वसीम ने कहा कि अस्पताल में एक मरीज की मौत होने की सूचना मिली थी.  बाद में पता चला कि उसके परिजन शव को बाइक से लेकर घर चले गए. मरीज के परिजन एंबुलेंस के लिए मेरे पास नहीं आए थे.  वैसे BPL परिवारों के लिए गाड़ी की सुविधा मुफ्त में दी जाती है .जांच के लिए एक टीम गठित कर दिया गया है.

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