Home इंटरव्यू दिल्ली से दूर गांव में जला रहे हैं ज्ञान के दीपक

दिल्ली से दूर गांव में जला रहे हैं ज्ञान के दीपक

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बीडीएन, रिपोर्ट. सरकार की योजनाएं दिल्ली से चलती है तो पता नहीं वह राजधानी पटना होकर गांव तक कब और कितने दिनों में पहुंचती है. पर कोई व्यक्ति संकल्प ले तो बस चंद दिनों मे दिल्ली से गांव तक किसी काम को  पहुंचाना संभव है. इसी तरह का प्रयास संतोष राठौर ने किया है. बिना किसी सरकारी मदद के. दिल्ली में रहकर वैशाली जिले के देसरी प्रखंड में ज्ञान का अलख जगाने में जुटे हैं. गांव में जहां सरकारी व्यवस्था चरमरा गयी हो. बच्चे भोजन के लिए स्कूल जाते हों. बस्ते के नाम पर कुछ नहीं है. किसी भी क्लास में पढ़नेवाले बच्चे हो, पर शुद्ध लिखना पढ़ना तो दूर की बात है. ऐसी स्थिति में गांव के बच्चों को पढ़ाई-लिखाई सीखाने का वीणा उठाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

खास कर के उन बच्चे-बच्चियों के लिए जो समाज के हासियें पर जीवन गुजर-बसर कर रहे हैं. ये बच्चे अति पिछड़ी व महादलित समाज से आते हैं. घर में बकरी और मवेशी पालन ही उनकी जिम्मेवारी का हिस्सा है.  ऐसे ही बच्चों के लिए संतोष राठौर  ने समर्पण फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा की लौ जलाने का प्रयास किया है. देसरी प्रखंड़ के पांच पंचायतों  में उनके द्वारा महादलित और अतिपिछड़े समाज के बच्चे-बच्चियों को निजी स्कूलों की भांति शिक्षा देने का प्रयास शुरू किया गया है.

ऐसे हुई शुरूआत

वैशाली जिला के देसरी प्रखंड में पहले चरण में  26 महादलित बच्चों के साथ जुड़कर 26 फरवरी 2017 को शिक्षा का अलख जगाने की शुरुआत हुई. संकल्प लिया कि इस क्षेत्र के महादलित परिवार के बच्चों को कैसे शिक्षा के लिए कैसे प्रेरित किया जाये. उनको स्कूल तक पहुंचाना और साथ ही उनको जो शिक्षा मिले वह बेहतर स्कूल के बच्चों के समान हो. इसकी व्यवस्था स्थापित करने की चुनौती थी. इसी तरह की चुनौती से शुरूआत किया गया. विद्यार्थियों को मुफ्त में किताबें और कांपियां दी गयीं. सबसे अधिक योगदान मिला उस गांव की महिला स्वयंसेवकों से. गांव कि शिक्षित महिलाएं आगे आयीं और ज्ञान के अंधेरे में रहनेवाले इन बच्चों  को रोशनी की लौ जगाने की शुरूआत की गयी.

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