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बबलू दूबे हत्याकांड के दो शूटर गिरफ्तार

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विजय कुमार, रक्सौल-बबलू दुबे हत्या कांड में पुलिस को बड़ी सफलात मिली है।पुलिस ने सोमवार को बबलू दुबे हत्याकांड में  दो शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है।दोनों शूटर मोतिहारी के रहने वाले हैं। पुलिस ने यह खुलासा किया है  कि बबलू दुबे हत्याकांड का मास्टर माइंड राहुल सिंह ही है. जो फिलहाल मोतिहारी जेल में बंद है। गुरुवार को बेतिया कोर्ट परिसर में हमलावरों ने कुख्यात अपराधी और नेपाली व्यवसायी सुरेश केडिया अपहरण का मास्टरमाइंड बबलू दुबे को कोर्ट परिसर में ही भून डाला था। बबलू दुबे को पुलिस कोर्ट में पेशी के लिए लाई थी। तभी पहले से प्लान बना कर बैठे तीन अपराधियों ने कुख्यात बबलू दूबे पर ताबडतोड़ फायरिंग कर दी.  बबलू को कुल पांच गोलियां मारी गई थी। गोली लगने के बाद बबलू दुबे की ऑन स्पॉट ही मौत हो गई थी।कोर्ट परिसर में हुई इस हत्या के बाद बेतिया में सनसनी फैल गई थी।इस हत्याकांड के बाद पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने शुरू हो गये थे।मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर डीआईजी साथ ही चंपारण प्रक्षेत्र के प्रभारी डीआईजी अनिल कुमार सिंह को इस मामले को अपने हाथ में लेना पड़ा था।बता दें कि डीआईजी सिंह ने स्वयं भी इस बात को स्वीकार किया था कि इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक हुई है।मुजफ्फरपुर डीआईजी ने एस्कॉर्ट टीम को भी निलंबित करने का आदेश दिया था. पुलिस लगातार इस मामले को लेकर छापेमारी कर रही थी।
दुबे उर्फ़ मिथलेश दुबे के हत्या की हकीकत जानकर शायद आपको अपने कानों पर विश्वास न हो लेकिन बबलू दूबे की हत्या की गुत्थी ही कुछ ऐसी है जिस पर यकीन करना जरा मुश्किल है. पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर इस हत्या की गुत्थी सुलझा दी है. इसका खुलासा आज बेतिया पुलिस कप्तान विनय कुमार ने किया.
इस खुलासे के बाद यह विश्वास करना मुश्किल हो जाएगा कि बबलू दूबे की हत्या एक ऐसे शख्स ने की जिसके बारे में शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा. एसपी विनय कुमार ने बताया कि हत्या के बाद शुरुआत में ही कुछ सुराग मिले थे. घटनास्थल से मिले मोबाइल और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बहुत कुछ तो तत्काल ही स्पष्ट हो गया था. लेकिन पुलिस पूरी तरह से सबकुछ तसल्ली कर लेना चाहती थी ताकि अपराधियों को पकड़ने में कहीं कोई चूक न हो जाए. एसपी ने बताया कि जब सारी कड़ियों को एक दूसरे से मिलाया गया तो चौंकाने वाले कुछ तथ्य सामने आए. दरअसल बबलू दूबे की हत्या में मोतिहारी किशोर सुधार गृह में रह रहे एक लड़के सूरज मेहता का नाम सामने आया है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
बताया गया कि हत्या के बाद सूरज वापस सुधार गृह पहुंचा. इधर पुलिस की दबिश भी सुधार गृह की ओर बढ़ती जा रही थी. पुलिस की इस बढ़ती हलचल से सूरज को कोई खास फर्क नहीं पड़ा. लेकिन सुधार गृह में रह रहे कुछ अन्य लोगों को बबलू दूबे की मौत से गहरा सदमा लगा था और उसकी मौत की खबर सुन कुछ लोग तो रोने भी लगे थे. इस बात को देखकर सूरज काफी सोच में पड़ गया था. उसे लगने लगा था कि आने वाले समय में कहीं ये लोग ही इस बात का खुलासा न कर दें कि बबलू दूबे की हत्या में वह भी शामिल था. लिहाजा डर कर वह हत्या के दो दिन बाद सुधार गृह से भाग निकला और जाकर अपने घर छुप गया. पुलिस ने उसे उसके घर से ही गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में पुलिस ने एक और शख्स की गिरफ़्तारी की है जिसका नाम विजय यादव बताया गया है. यह बेतिया मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पर्वतिया टोला का निवासी है.
बता दें कि विजय यादव पर पहले से ही कई थानों में जाली नोट, मारपीट, आर्म्स एक्ट, डकैती समेत कई मामलों में नामजद रहा है. उसके घर के अन्य पुरुषों का भी आपराधिक बैकग्राउंड रहा है. विजय यादव ने बबलू दुबे की हत्या में अहम भूमिका निभाई थी. इसी ने हत्या में शामिल शूटरों के रहने आदि की व्यवस्था की थी. एसपी ने बताया कि विजय यादव लॉज का कारोबार करता है. जमीन पर अवैध कब्जा करके अपने दबंगई के बल पर उस पर लॉज बनवाता है. उसके लॉज में स्टूडेंटतो रहते हैं साथ ही इन्हीं लॉज में आपराधिक छवि के लोग भी शरण लिया करते थे. बबलू दुबे की हत्या में शामिल शूटरों ने भी शाम में पहुंच कर पहले विजय यादव से संपर्क साधा और फिर रात भी इसी लॉज में बिताई थी।बबलू दुबे की हत्या के लिए 6 मई की तारीख ही मुकर्रर की गई थी. लिहाजा 5 मई की शाम में अपराधी विजय यादव के यहां पहुंच गए थे. लेकिन 6 मई को यह पता चला की आज उसकी पेशी नही होगी।एसपी ने बताया कि इस हत्या में जेल से राहुल सिंह, विकास सिंह और छोटाई सिंह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अतिरिक्त मोतिहारी के सुधार गृह से दो लोग एक सूरज मेहता दूसरा सुमन सौरभ इस हत्या में शामिल थे. एसपी की मानें तो जेल से और भी कुछ लोग इस योजना में शामिल थे. लेकिन फिलहाल इनकी निशानदेही पर शक है. उन्होंने बताया कि इस घटना में मोतिहारी जेल से फरार कुणाल सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अतिरिक्त मनीष सिंह, संजय सिंह सिगरेट और रिपुसूदन समेत कई अन्य लोगों के नाम भी इस मामले में सामने आया है. बता दें कि यह वही कुणाल सिंह है जिसने फोन करके इस घटना की जिम्मेदारी ली थी. पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि इस हत्याकांड में चार मोटरसाइकिलों का प्रयोग किया गया था, जिसमें एक अपाची, एक ग्लैमर व दो अन्य मोटरसाइकिलें शामिल थी।जब 6 तारीख को घटना को अंजाम न दी जा सकी तो कुणाल सिंह ने इसके लिए तत्काल दूसरी तारीख मुकर्रर की. उसने 11 मई को शूटरों को ट्रेनिंग देकर यह बताया कि कहां से गोली चलानी है और कैसे वहां से भागना है. भागने के समय यदि कुछ समस्या होती है तो उस समय उन्हें क्या करना है. ये सारी बातें कुणाल सिंह ने इन शूटरों को पहले ही समझा दी थी. 11 तारीख को इस ट्रेनिंग के बाद सभी लोग पुनः विजय यादव के लॉज पर पहुंचे. इस क्रम में पहले तीन लोग आए जिसमें रिपुसूदन, सूरज मेहता और सुमन सौरव के नाम शामिल हैं.इस हत्याकांड को यूं ही अंजाम नहीं दिया गया. इसके लिए कई लोगों की मिलीभगत सामने आ रही है. भले ही पुलिस ने फिलहाल दो लोगों को ही गिरफ्तार किया है लेकिन इस मामले में कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है. बता दें कि विजय यादव के लॉज में ठहरे शूटरों को कोर्ट में हो रही गतिविधियों की पल-पल की जानकारी दी जा रही थी. शूटरों को जब यह पता चला कि कोर्ट में बबलू दूबे पहुंच चुका है तब शूटरों ने कोर्ट की ओर प्रस्थान किया. वहां से वे सीधे कोर्ट के समीप एक मॉल के पास पहुंचे, जहां उन्होंने नाश्ता भी किया. उसके बाद कोर्ट परिसर पहुंचकर उन्होंने कोर्ट के माहौल को परखा. बबलू दूबे को देखते ही उन्हें गोली चलाने की सूझी लेकिन उस समय उन्हें माहौल इसके अनुकूल नहीं लगा, लिहाजा उन्होंने इंतजार करना मुनासिब समझा. जब पेशी के बाद बबलू दूबे कोर्ट से वापस आ रहा था, तब अपराधियों ने उसपर धड़ाधड़ गोलियां चलानी शुरु कर दीं. पहली गोली सुमन सौरभ ने चलाई और अंत की दो गोलियां सूरज मेहता ने मारी. इस घटना को अंजाम देकर वे भीड़ का हिस्सा बन गए और भगदड़ का फायदा उठाकर वहां से बच निकले.एसपी विनय कुमार ने बताया कि न्यायालय परिसर में जो माहौल था, उस माहौल में किसी को गोली मारना और वापस बचकर निकल जाना काफी हिम्मत का काम है. यह दुस्साहस आत्मघाती भी साबित हो सकता था. उन्होंने बताया कि हमला करने के बाद पुलिस की गोली से भी अपराधी मारे जा सकते थे. इसके अतिरिक्त भीड़ के गुस्से का शिकार भी हो सकते थे. लेकिन उन्हें किस कदर प्रशिक्षित किया गया था, यह वाकई सोचने की बात है. अपराधियों ने अपनी जान की जरा भी परवाह नहीं की और अपने काम को अंजाम देकर मजे से फरार हो गए।
बता दें कि पहले भी आपसी वर्चस्व को लेकर हत्याएं होती रही हैं. यह घटना भी उसी कड़ी का एक हिस्सा है. यहां बता दें कि कुणाल सिंह और बबलू दुबे में पूर्व से ही विवाद था. इसके अतिरिक्त नेपाल के व्यवसायी सुरेश केडिया के अपहरण में बबलू दूबे के विरोधियों को ऐसा लगा कि उसने इसमें काफी पैसा कमाया है और उन्हें उसका हिस्सा नहीं दिया. लिहाजा यह वर्चस्व की लड़ाई और आगे निकल गई और परिणामस्वरूप बबलू दुबे की हत्या कर दी गई.

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